भक्ति सरिता: साधना शाही का काव्य संग्रह: पुस्तक समीक्षा
पुस्तक समीक्षा: भक्ति सरिता कवयित्री: साधना शाही शैली: काव्य संग्रह | विषय: भक्ति, भारतीय त्योहार, आध्यात्मिक चेतना एक नई आवाज़, एक पुरातन भाव भक्ति की बात करते ही ज़हन में मंदिर, आरती, श्लोक और पुरानी परंपराएँ आ जाती हैं। लेकिन क्या भक्ति का रूप आज भी उतना ही जीवंत है? क्या उसे केवल पुरानी किताबों या पांडुलिपियों में ही ढूंढा जा सकता है? साधना शाही का पहला काव्य संग्रह भक्ति सरिता इस सोच को पूरी तरह नया आकार देता है। यह किताब दिखाती है कि भक्ति कोई पुराना रिवाज़ नहीं, बल्कि आज की ज़िंदगी में उतनी ही ज़रूरी मानसिक और भावनात्मक ज़रूरत है जितनी कभी थी। फर्क बस इतना है कि अब हमें उसे नये अंदाज़ में समझाने और महसूस करने की ज़रूरत है। यही काम यह संग्रह बख़ूबी करता है। पुस्तक की आत्मा: हर महीने, हर त्योहार, एक भजन यह संग्रह सीधे दिल से निकला है और दिल तक पहुंचता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें हिंदी कैलेंडर के अनुसार 12 महीनों के सभी प्रमुख त्योहारों पर आधारित भजन शामिल हैं । लेकिन ये भजन सिर्फ़ परंपरा निभाने के लिए नहीं हैं। इनका उद्देश्य कहीं ज़्यादा गहरा है—हर...